Guest Teacher

Monday, January 31, 2011

स्थायी सफलता चाहिए तो...

 




हमें परखने के लिए जिन्दगी में कभी जीत की खुशी आती है, तो कभी हार के गम आते हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसका सामना कैसे करें। जब भी हम किसी अपने क्षेत्र में सफल व्यक्ति की जिन्दगी की कहानियां सुनते हैं, तो ऐसे लोगों के जीवन में सफलता मिलने से पहले उन्हे हताशा देने वाली बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें जीत इसीलिए मिली क्योंकि वे कभी हार से निराश नहीं हुए।


जीव विज्ञान के एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे कि सूंडी या मॉथ तितली में कैसे बदल जाती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि तितली आसानी से अपनी खोल से बाहर नहीं आ पाती है। उसे इसके लिए काफी समय संघर्ष करना पड़ता है। ये बात वे अपने छात्रों को सूंडी के खोल को दूर से दिखाकर समझा रहे थे। तभी एक छात्र ने पूछा क्या हम इनकी मदद नहीं कर सकते तो शिक्षक ने उसे सख्त हिदायत दी कि वह भूल कर भी यह गलती ना करे। इतना कह कर शिक्षक को चपरासी बुलाने आया। वो वहां से चले गए। 



सभी छात्र इंतजार कर रहे थे कि तितली वहां से बाहर निकले। तितली बाहर निकलने के लिए मेहनत करने लगी। उस छात्र से देखा नहीं गया। उसने तितली की मदद करने का फैसला किया। सभी छात्रों के मना करने के बावजूद उसने खोल से तितली को बाहर निकाल दिया। जिससे तितली को मेहनत ना करना पड़े, लेकिन थोड़ी देर में ही वह तितली मर गई।


वापस लौटने पर जब शिक्षक को इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने कहा बिना मेहनत के मिली सफलता ऐसी ही होती है। शिक्षक ने अपने छात्रों को बताया कि तितली का वह थोड़ी देर का संघर्ष ही उसे असली मजबूती देता है। वह उस संघर्ष के बाद बाहरी माहौल के अनुकूल अपने आपको स्थापित कर पाने और जीवित रह पाने में सक्षम हो पाती है। शायद तुम उसे संघर्ष करने का मौका देते तो बाहरी माहौल मे संघर्ष कर ज्यादा लंबी जिन्दगी जी पाती।
( दैनिक भास्कर )

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