Guest Teacher

Tuesday, January 24, 2012

हम सब हैं विनर्स ( विजेता )

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प्रतियोगिता जब आखिरी चरण में होती है, तो अचानक ही दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। न जाने कौन जीतेगा? या फिर अबकी बार तो मेरा नाम ही आने वाला है। इस तरह के न जाने कितनी बातें आप खुद से करने लगते हैं। खैर गलती आप सबकी भी नहीं है। प्रतियोगिता से कुछ लोगों का सीधा मतलब होता है, जीतना। अगर आप किसी प्रतियोगिता में द्वितीय या तृतीय भी आए तो भी कोई खास प्रसन्नता नहीं होती है।

पर सबसे अहम है प्रतियोगिता के मायने समझने की। प्रतियोगिता मतलब खुद को साबित करने का एक मौका। हार-जीत तो प्रतियोगिता का एक हिस्सा है। किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से आप स्वयं में कुछ अच्छा बदलाव महसूस करेंगे।

छात्र जीवन यानी दोस्त, पढ़ाई और पिकनिक और खेल-कूद..बस। लेकिन आप कुछ भूल तो नहीं रहे हैं। अभी-भी याद नहीं आया। अरे भाई! परीक्षाएं? हां..अब आई न बात समझ में। छात्र जीवन में परीक्षाएं किसी हौव्वे से कम नहीं है।

अरे, अरे!!! अभी से आप इतना क्यों परेशान होने की Êारूरत नहीं है। चलिए, हम एनुअल ए की बात नहीं करते हैं। इसके अलावा होने वाले दूसरे कॉम्पटीशंस की बात करते हैं। जो वर्ष भर आपके यहां आयोजित होते रहते हैं। कई में तो आप भाग भी लेते होंगे। इससे आपके भीतर प्रतिभा को निखारने का काम किया जाता है। और आखिर में आकर किसी एक को विजेता घोषित किया जाता है।
अब इस प्रकार की प्रतियोगिताओं में जो जीत जाते हैं उनको तो बेहद खुशी मिलती है और वो आगे से और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उत्साहित हो जाते हैं। पर जो इसमें पिछड़ जाते हैं, वो दुखी हो जाते हैं। किसी भी प्रतियोगिता में पिछड़ जाने का मतलब ये कतई नहीं होता है, कि आपमें काबिलियत की कमी है। बल्कि सच तो यह है कि प्रतियोगिता में विजेता तो सिर्फ एक ही हो सकता है न।
जहां सफलता किसी के भीतर नए उत्साह को भर देता है, वहीं असफलता लाती है ढेर सारे आंसू। लेकिन आप जानते हैं प्रतियोगिता का मतलब खुद को हर स्तर पर निखारने का एक मौका होता है। अगर ये प्रतियोगिताएं हमारे जीवन से गायब हो जाएं तो फिर हम बहुत ही आलसी हो जाएंगे। खुद को निखारने की कोशिश ही नहीं करेंगे। यही तो हैं जो हमें जीवन में आगे और आगे निकलने की प्रेरणा देती हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने से निर्णय-क्षमता, आत्मनियंत्रण, अनुशासित और समझदार बनते हैं।

अपनी क्षमता को जानने के लिए प्रतियोगिता ही सबसे बेहतर मंच होता है। इस दौरान हुई गलतियों को देखना और विजेता की खूबियों से कुछ सीखने का एक मौका भी मिलता है।
पर कभी-कभी ये प्रतियोगिताएं ही दो लोगों को आपस में विरोधी बना देती हैं या फिर कभी-कभी हारने के बाद खुद से विश्वास सा उठ जाता है। आप जानते हैं ये कब होता है, जब हम इनका आनंद नहीं उठाते हैं, उसे अपने जीवन-मरण का प्रश्न बना लेते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि प्रतियोगिता यानी सिर्फ जीत, चाहे वो कैसे भी प्राप्त हो। पर ये सही नहीं है।

कुछ देर रुकिए और कॉम्पटीशन शब्द को बोलिए, अब आपको कैसा महसूस हो रहा है। सकारात्मक सोच, नकारात्मकता या फिर स्वभाविक ही हैं। दरअसल, ये छोटा सा परीक्षण था, खुद को परखने का। इस शब्द को सुनने के बाद आपको जो महसूस होगा, ठीक वैसा ही आप प्रतियोगिताओं के बारे में सोचते हैं।

आप इसे सकारात्मक लें, इससे आपके भीतर आत्मविश्वास भर जाएगा और फिर नए उत्साह के साथ आप इसे जीतने का भरसक प्रयास करें।

प्रतियोगिताएं आपको सशक्त व्यक्तित्व से भर देता है, जिससे आप आने वाले जीवन में हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करें।

आप हमेशा एक बात याद रखना कि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की वजह से आपके व्यक्तित्व में हुए परिवर्तन को आप तुरंत नहीं माप सकते हैं, बल्कि इससे प्राप्त परिणाम आपको बाद में ही प्राप्त होंगे।
मस्ती के साथ अपने आप को बेहतर बनाने का मंच ये प्रतियोगिताएं हैं। तो इस मंच पर अपने अपनी योग्यताओं का जमकर प्रदर्शन करें। लेकिन मन में किसी के प्रति खटास न लाएं। जीतना ज़रूरी नहीं है, ज़रूरी है भाग लेना। तो फिर कमर कस लो कर लो तैयारी, अबकी है तुम्हारी बारी। ( दैनिक भास्कर )














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