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Tuesday, January 24, 2012

टैक्स बचत का कारगर जरिया..?

 

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कर बचत के इस मौसम में हर कोई ऐसे उपाय तलाशने में लगा है जो निवेश के साथ-साथ कर बचाने का भी माध्यम हो। इस सीरीज में हम बता रहे हैं ऐसे ही कुछ उपाय। कल हमने जिक्र किया था ईएलएसएस का, आज बता रहे हैं कि बीमा कैसे आपके लिए बन सकता है टैक्स सेविंग का माध्यम। शुक्रवार के अंक में हम चर्चा करेंगे एनपीएस, पीपीएफ, ईपीएफ की जो आमतौर पर सेवानिवृत्ति के लिए इस्तेमाल होते हैं।

बीमा क्यों है लाभप्रद
अगर परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए जीवन बीमा लेना है तो टर्म इंश्योरेंस है सबसे अच्छा विकल्प
बढ़ते मेडिकल खर्च को देखते हुए अब हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लेना हो गया है जरूरी
पेंशन योजनाएं भी आयकर लाभ पाने का है एक जरिया, लेकिन तमाम पहलुओं को समझना है जरूरी

लाभ को समझें
बीमा योजनाओं में जीवन बीमा के विभिन्न विकल्प जैसे यूलिप,एंडोमेंट प्लान, पेंशन प्लान, चाइल्ड प्लान, टर्म प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस आदि शामिल हैंजीवन बीमा योजनाओं के प्रीमियम के भुगतान पर धारा 80सी के तहत मिलता है टैक्स कटौती का लाभ
हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में आयकर का लाभ मिलता है धारा 80डी के अंतर्गत

हर वित्त वर्ष में दिसंबर से मार्च के दौरान बीमा एजेंटों की चांदी होती है। दरअसल, इस अवधि में करदाताओं को आयकर में बचत का सबसे अच्छा जरिया बीमा ही नजर आता है। इसकी एक वजह एजेंटों की सक्रियता भी है।

बीमा योजनाओं में जीवन बीमा के विभिन्न विकल्प जैसे यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप), एंडोमेंट प्लान, पेंशन प्लान, चाइल्ड प्लान, टर्म प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस आदि शामिल होते हैं। जीवन बीमा योजनाओं के प्रीमियम के भुगतान पर धारा 80सी के तहत टैक्स कटौती का लाभ मिलता है, वहीं हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में आयकर का लाभ धारा 80डी के अंतर्गत मिलता है।

जीवन बीमा के जरिये कर बचत : चंडीगढ़ स्थित मार्वेल इन्वेस्टमेंट्स के सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर मणिकरन सिंघल कहते हैं कि अगर परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए जीवन बीमा लेना है तो टर्म इंश्योरेंस सबसे अच्छा विकल्प है। अगर किसी के पास पहले से ही पर्याप्त बीमा कवर है तो वह यूलिप जैसे प्रोडक्ट में निवेश कर सकते हैं, बशर्ते कि उनका नजरिया दीर्घावधि का है। लेकिन कर बचत के लिहाज से जीवन बीमा पॉलिसी लेने से पहले प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड को ध्यान में रखना जरूरी है।

प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड के अनुसार धारा 80सी (प्रीमियम के भुगतान) और परिपक्वता पर मिलने वाली राशि पर धारा 10 (10डी) के तहत छूट पाने के लिए यह जरूरी होगा कि कवर की राशि सालाना प्रीमियम का 20 गुना हो। सिंघल कहते हैं कि कर बचत के लिए ली गई बीमा पॉलिसी डायरेक्ट टैक्स लागू होने के बाद भी लाभ दे, इसलिए विभिन्न पहलुओं पर पहले ही निवेशकों को विचार कर लेना चाहिए।

आम तौर पर टर्म इंश्योरेंस और कुछ चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान के अंतर्गत सम एश्योर्ड सालाना प्रीमियम का 20 गुना होता है। कर बचत के इच्छुक लोगों को सर्वप्रथम अपनी जरूरत के अनुसार इन पर विचार करना चाहिए। बीमा नियामक के लगातार प्रयासों के बाद यूलिप के खर्चे पहले से कहीं कम हुए हैं।

अगर कर बचत के लिहाज से यूलिप के निवेश का सहारा लेना ही पड़े तो जानकारों के मुताबिक इसमें कम से कम 15-20 साल तक अपना निवेश बनाए रखना चाहिए, लेकिन प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड के प्रावधानों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं रहेगा। यूलिप की लॉक-इन अवधि 5 साल है और 5 साल बाद पैसे की निकासी पर कोई सरेंडर शुल्क नहीं लगाया जाता है।

पेंशन योजनाएं : आयकर में लाभ पाने का एक जरिया पेंशन योजनाएं भी है। आयकर विशेषज्ञ सुभाष लखोटिया कहते हैं कि दिलचस्प बात यह है कि पेंशन योजनाओं के प्रीमियम के भुगतान पर जहां धारा 80सी के तहत छूट मिलती है, वहीं जब इससे निकासी की जाती है तो वह निवेशक की आय में जुड़ जाती है और निवेशक जिस कर वर्ग में आता है उस हिसाब से उसकी कर देनदारी बनती है।

हेल्थ इंश्योरेंस : मेडिकल खर्च में लगातार हो रही बढ़ोतरी का देखते हुए वर्तमान समय में हेल्थ इंश्योरेंस लेना जरूरी हो गया है। सिंघल कहते हैं कि स्वयं और परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने पर आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत आयकर में छूट का लाभ मिलता है। तरजीही तौर पर जीवन बीमा के बाद हेल्थ इंश्योरेंस निश्चित रूप से लिया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अगर लोग माता-पिता के लिए ली गई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम भरते हैं तो आयकर में 20,000 रुपये तक का लाभ उठाया जा सकता है। अगर दोनों मिला कर देखें तो यह लाभ 35,000 रुपये का होता है। ( दैनिक भास्कर )






 

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